अंतिम अरण्य निर्मल वर्मा द्वारा लिखा गया उपन्यास है। आखिरी रचना के तौर पर यह उपन्यास उनके द्वारा लिखा गया। निर्मल वर्मा नई कहानी आंदोलन के एक प्रणेता के तौर पर जाने जाते है। उनके द्वारा लिखी गई कहानी 'परिंदें' मैंने सर्वप्रथम पढ़ी थी। यह उपन्यास वृद्धावस्था, स्मृति और मृत्यु के प्रश्नों के आसपास केन्द्रित है। अंतिम अरण्य न केवल एक कहानी है बल्कि स्मृति, मृत्यु और पहचान के सवालों पर निर्मल वर्मा की अंतिम, परिपक्व और चिंतनशील प्रस्तुति है। कथा एक छोटे पहाड़ी टाउन के परिवेश में चलती है जहाँ मेहरा साहब नामक वृद्ध पुरुष उपन्यास का केन्द्रीय पात्र है। उनकी पत्नी दीवा का जिक्र और उनकी एक बेटी तिया भी कथानक में आते हैं; कस्बे में एक जर्मन महिला अन्ना (Anna) तथा डॉ. सिंह, निरंजन बाबू, मुरलीधर आदि सहचरित्र मौजूद हैं। स्मृतियाँ अलग-अलग अध्यायों/खंडों में स्वतंत्र-स्वरूप रूप में आती हैं और एक समग्र ‘स्मृतिलोक’ बनाती हैं; इसलिए उपन्यास में घटनाओं की रैखिकता कम और स्मृतियों-केन्द्रित संरचना अधिक है। उपन्यास का परिवेश पहाड़ों और जंगलों का है। उपन्यास में पहाड़ और उसका सन्नाटा केवल पृष्ठभूमि ...
शब्द मेरी भावनाओं के चोले में