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अंतिम अरण्य - पुस्तक समीक्षा

अंतिम अरण्य निर्मल वर्मा द्वारा लिखा गया उपन्यास है। आखिरी रचना के तौर पर यह उपन्यास उनके द्वारा लिखा गया। निर्मल वर्मा नई कहानी आंदोलन के एक प्रणेता के तौर पर जाने जाते है। उनके द्वारा लिखी गई कहानी 'परिंदें' मैंने सर्वप्रथम पढ़ी थी।  यह उपन्यास वृद्धावस्था, स्मृति और मृत्यु के प्रश्नों के आसपास केन्द्रित है। अंतिम अरण्य न केवल एक कहानी है बल्कि स्मृति, मृत्यु और पहचान के सवालों पर निर्मल वर्मा की अंतिम, परिपक्व और चिंतनशील प्रस्तुति है। कथा एक छोटे पहाड़ी टाउन के परिवेश में चलती है जहाँ मेहरा साहब नामक वृद्ध पुरुष उपन्यास का केन्द्रीय पात्र है। उनकी पत्नी दीवा का जिक्र और उनकी एक बेटी तिया भी कथानक में आते हैं; कस्बे में एक जर्मन महिला अन्ना (Anna) तथा डॉ. सिंह, निरंजन बाबू, मुरलीधर आदि सहचरित्र मौजूद हैं। स्मृतियाँ अलग-अलग अध्यायों/खंडों में स्वतंत्र-स्वरूप रूप में आती हैं और एक समग्र ‘स्मृतिलोक’ बनाती हैं; इसलिए उपन्यास में घटनाओं की रैखिकता कम और स्मृतियों-केन्द्रित संरचना अधिक है। उपन्यास का परिवेश पहाड़ों और जंगलों का है। उपन्यास में पहाड़ और उसका सन्नाटा केवल पृष्ठभूमि ...

नमो कुरुक्षेत्र

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मैने एक पुस्तक पढ़ी जिसका नाम था- नमो कुरुक्षेत्र जो कि पंतनगर विश्व विद्यालय के एक प्राध्यापक डॉक्टर शिवेंद्र कश्यप जी ने लिखी है। पुस्तक में महाभारत के वृतांतों के माध्यम से युवा पीढ़ी के मन में उठने वाले अनेक द्वंदों के लिए सरल उत्तर दिए गये हैं। कुछ पंक्तियाँ जिन्होंने मुझे प्रभावित किया इस प्रकार है- 1. बड़े त्याग के लिए वही आगे आते हैं जो सबसे प्रतिभावान, चमकते हुए, सर्व श्रेष्ठ होते हैं। जिनके पास कम होता है, वे घबराते है बाँटते हुए। 2. जैसे घी डाल डालकर अग्नि बुझाने की कल्पना करना मुर्खता है, वैसे भी इच्छाओं की पूर्ती कर-कर के खुश और संतुष्ट रहने की कोशिश करना मुर्खता है। 3. ज्यादा अर्जित करने या कुछ बड़ा कर के दिखाने के मुकाबले देश और समाज को ज्यादा लौटा पाने की प्रतिबद्धता और इच्छा मनुष्य को राष्ट्र निर्माता बनाती है। 4. जीवन में प्रतिभा का महत्व कम और उद्देश्य का महत्व ज्यादा है। 5. अच्छाई - सच्चाई के मार्ग पर अनेकों संघर्ष हैं पर सच्चे योद्धा तूफानों से विचलित नही होते। प्रतिरोध उनका सोपान है और पराजय उनकी प्रेरणा, प्रतिकूलता उनकी सहचरी है और स्पर...

A way towards PEACE

Most people live whether physically, intellectually or morally- in a very restricted circle of their potential being. We all have reservoir of life to drew upon of which we do not dream.                          - William James In the book entitled "The Monk who sold his Ferrari" by Robin Sharma, the great sages of Shivana told a feble to Julian. Julian was a famous law practitioner, who got heart attack in the middle of court room due to the hyper- competitive legal professional world. Then he took retirement from his legal world and he went to the Sages of Sivana in order to find out peace. The great Yogi Raman told a feble to Julian Mental. In that feble, he told about a garden, which was a symbol for the human mind. The sages of Shivana told certain benefitial things like which I would like to share: If you care about your mind, if you nurture it and if you cu...