रिक्तता भीतर की जो कि भरना चाहती है कविता, ग़ज़ल, प्यार, दोस्ती, यात्रा, किताब, संगीत, कला, युद्ध, विजय आदि जैसे माने है इसे भरने के बावजूद इसके भी नहीं भर पाती है और हमारे ही किसी ...
पहाड़ से मैदान की ओर लगातार बह रहा लोगों का हुज़ूम एक दिन बना देगा पहाड़ के जीवन को सिंधु घाटी की तरह इतिहास का एक विषय जो पढ़ाया जाएगा बिना समझे ही स्कूल में हमारे द्वारा। - शाल...
सोचती हूँ तुम्हारे लिए एक इमारत बनाऊ कंकड़ पत्थर संगमरमर से नहीं वरन शब्दों, कलम और कविताओं से जहाँ तुम दुनिया से थक जाने पर आराम कर सकोगें। - शालिनी पाण्डेय
पहली बार मैंने उसकी आँखों को पढ़ा उसकी आँखें बया कर रही थी वो सब जो वो जुबान तक ना ला पाया था देखा मैंने स्नेह के उमड़ रहे सैलाब को जिसमें वो तैरना सीख चुका था और मैंने महसूस कि...