क्यूं

अब जब मैं
निकल आई हूं
तुमसे दूर

इतना दूर
कि सूरज की रोशनी भी
मुझे नहीं छू सकती

अब तुम क्यूं
मुझे वापस
ढूढंने निकले हो?

--  शालिनी पाण्डेय

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