माँ
यूँ तो अब मुझे आदत सी हो चली है अकेलेपन और नीरस दिनचर्या की, शहर की इस नीरस दिनचर्या में उलझे हुए वक़्त आसानी से गुज़र जाता है लेकिन, जब कभी हो कोई खास दिन जैसे कोई त्योहार या जन्मदिन तब, तुम मुझे बहुत याद आती हो माँ। - शालिनी पाण्डेय
शब्द मेरी भावनाओं के चोले में