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गुलमोहर

तुम्हें याद है गुलमोहर का पौधा, वर्षों पहले जिसको लगाया था, आंगन में ? हवा के साथ हर सवेरे  उसकी पंखुड़ियां  गुनगुनाती है, कोई मौसम अब चुरा ना सकेगा तेरी खुशबू,  यूं ही हर रोज तू महका करेगा मेरे दामन में। - शालिनी पाण्डेय