साथ में जिये लम्हें

साथ में जिये लम्हें
भीतर के किसी कोने में
थोड़ी जगह घेरे रहते है
और
शुष्क मौसम से
ऊब चुकी साँसों को 
हवा देकर जिंदा रखते है....

- शालिनी पाण्डेय 

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