लंबे अरसे से

लंबे अरसे से
इन यात्राओं के माध्यम से
मैं चली आ रही हूं 
तुम्हारी ओर को...

यात्रा के हर पड़ाव पर 
पाती हूँ कुछ तुम्हें और 
बचे हुए को पाने की आस लिए 
बढ़ती जाती हूं...

-शालिनी पाण्डेय

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