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बारिश और गिले शिकवे

एक अंतराल के बाद
किसी अपने के
गले मिलने से
मन पर इकठ्ठा हो रहे
गिले-शिक़वे वैसे ही 
दूर हो जाते है
जैसे लंबे इतंजार के बाद
आई बारिश से
छतों पर जमा 
धूल और मिट्टी.....


- शालिनी पाण्डेय 

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