किरदार

ना सिग्नल थे
ना सोशल मीडिया
ना दोस्तों का हुजूम
ना ही पहचाना शहर

बस तुम थे और
जीवन का सफर

तुम तुम जैसे थे
मैं मैं जैसी
ना कोई वादे थे
ना कोई बंदिशें

बस दो किरदार थे
अपने आप को
खुद ही लिखते से।

--शालिनी पाण्डेय

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