बुनना

किसी रोज मैं
घण्टों पियानो
के पास बैठ कर
संगीत बुनने का
प्रयास करती हूं,

सिर्फ इसलिए कि
मुश्किल छणों में
इसकी धुन से
तुम्हारे मन को
गुंजायमान कर सकूँ ।

- शालिनी पाण्डेय

Comments

Popular posts from this blog

वो लौट आएँगे, फिर से पिता बनकर

हिमालय की अछूती खूबसूरती: पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक

दीवार में एक खिड़की रहती थी- पुस्तक समीक्षा