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कलाकार की मृत्य

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एक कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों को हँसाता, रुलाता, गुदगुदाता तो है ही। लेकिन इसके साथ-साथ वो अपने अभिनय से झकझोरता है, आपके भीतर मरती जा रही इंसानी संवेदनाओं को। वो चीखने पर मजबूर करता है, आपके भीतर ठंडी हो कर, जम चुकी, दबी आवाज़ों को।  उसके अभिनय से आप अपने भीतर के उन अँधेरे पहलुओं पर झांकने की हिम्मत जुटा पाते है, जिन्हें सूरज की रोशनी भी आपको नहीं दिखा पाती। अच्छा कलाकार जीवित रखता है आपके भीतर की बगावत को, आपके आत्म- सम्मान को। आपके भीतर मोहब्बत की बेल को पनपाने के लिए वो खाद, हवा, पानी जैसा काम करता है। अपने अभिनय से वो सभी धर्मों, सरहदों को छोटा साबित कर, आपको एक तर्कसंगत और संवेदनशील मनुष्य बनने हेतु प्रेरित करता है। हाँ, मृत्यु नियति है, हर उसकी जिसके भीतर जीवन है। ये हम सभी जानते है कि "जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु भी एक दिन हो जानी है"। भले ही आप जैसे और हम जैसे असंख्य लोगों की मृत्यु के कोई मायने नहीं होते।  लेकिन एक अच्छे कलाकार की मृत्यु के मायने होते है। एक कलाकार की मृत्यु सिर्फ उसकी अकेले की मृत्यु नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े असंख्य दर्शकों के जज्बातों, सप...

यादों का पहाड़

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ये जो तेरे और मेरे बीच के फासले है, उन पर मैं रोप दूंगी देवदार, सभी दुःखोंं को इकट्ठा कर बना दूंगी, एक नदी और विचरने के लिए बसा लूंगी, यादों का पहाड़। - शालिनी पाण्डेय

कोरा पन्ना

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मेरे पास एक कोरा पन्ना है जिसे मैं हर रोज कुछ रंग देती हूँ कभी खींच देती हूँ चित्र कभी लिख देती हूँ कविता कभी बना देती हूँ नदी और कभी  इसे मोड़कर इसके बीच में  रख देती हूँ सूखा एक पत्ता डूबते सूरज की उदासी,  मिट्टी की सुगंध, चिड़ियों के गीत से भी मैं रंगती हूँ इसे । कई बार रात-रात भर जागकर रंगती हूं इसे मेरे ऊपर गिर रहे पुरानी यादों के टुकड़ों से। पर इतना रंगने पर भी हमेशा आधी-अधूरी सी  तस्वीर ही बन पाती है क्या जिस दिन  पूरी तस्वीर बनेगी, उस दिन पूरा हो जाएगा जीवन?? - शालिनी पाण्डेय

दिल की जेब

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मेरे दिल की जेब  प्यार का सीपी संजोये हुए है समंदर किनारे बटोरी यादों भरी रेत समेटे हुए है.....   आज भी जब कभी  टटोलती हूँ इस जेब को  तो लहरें तेरा प्यार  मेरी साँसों तक ले ही आती है.....  - शालिनी पाण्डेय 

चांद के घाव

आज रात छत पर जाते ही   फूट-फूट कर रोने का मन किया,  चांद की चमक के पीछे छुपे घावों को देख लेने भर से। - शालिनी पाण्डेय 

तुम कुछ नहीं कहते

गहरे दर्द में भी तुम कुछ नहीं कहते, बस, उसे छुपा लेते हो अपने भीतर की तहों में....  जैसे छिपा लेती हैं धरती अपने अंदर उजड़े पहाड़ों और जंगलों की वेदना को.... - शालिनी पाण्डेय

गुलमोहर

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तुम्हें याद है गुलमोहर का पौधा, वर्षों पहले जिसको लगाया था, आंगन में ? हवा के साथ हर सवेरे  उसकी पंखुड़ियां  गुनगुनाती है, कोई मौसम अब चुरा ना सकेगा तेरी खुशबू,  यूं ही हर रोज तू महका करेगा मेरे दामन में। - शालिनी पाण्डेय