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चरवाहे

एक रोज 
मैं चली आऊँगी
तुम्हारे पास,
ठीक वैसे ही 
जैसे 
लौट आते है चरवाहे 
शिशिर के बाद
अपने-अपने घरों को...

-शालिनी पाण्डेय

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