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कैनवास वाले सपने की याद

आज भी तेरा जिक्र हुआ तो चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई पलक झपकते ही ख्याल आया कि तुझे एक कैनवास पर उतार दूँ और घर की हर दीवार पर सजा दूँ एकटक जी भर कर देखती रहूँ इस क़दर निहारती रहूँ कि खो जाऊं तुझमें कही भूल जाऊं कि मैं क्या हूं समा जाऊं तुझमे इस कदर कि ये फासले शून्य हो जाएं सीने से चिपट जाऊं ऐसे कि धड़कनों से मिल पाऊं इतने करीब आ जाऊं कि महसूस हो साँसों की गर्मी लग जाऊं इस तरह गले कि फिर कभी ना बिछड़ पाऊं आंखे खुलते ही ख्याल टूटा मैं स्तब्ध ताक रही थी लेकिन घर की दीवार बिल्कुल सूनी थी ये देख मैं थोड़ा घबरायी पर फिर कैनवास वाले ख्वाब की याद चेहरे पर हल्की सी मुस्कान ले आयी। -शालिनी पाण्डेय

संगिनी

वो लड़की, समझदार और आत्मनिर्भर क्यों भटक रही है? दर-दर पर जाकर, किसे आवाज दे रही है? समझ नही पा रही, उसकी तलाश को। जी चाह रहा कि पूछ लूं- आखिर चाहती क्या हो? क्यूँ मुझे यूं अशांत कर र...

सूरज दादा बोलो

सूरज की पहली किरण, स्पर्श करती धरा का सुप्त अवस्था निर्जीव से सजीव हो उठती पंखुड़ियों में गुम जल की बूंद मोती जैसे चमचमाती अंधियारी राहें प्रकाशित हो जाती नव आगंतुक पक्षी ...

वो चेहरा

वो चेहरा कितना जाना पहचाना सा ऊर्जावान और आशावादी धैर्यशील और उद्गामी कैसे जुटा रहता है दिन रात मेरी खुशियों के लिए हर दिन भागता दौड़ता मेरे आराम के लिए धूप में निरंतर तप र...

तलाश

ये तलाश ना जाने होगी कब पूरी तलाश भीड़ में अपनों को खोजने की तलाश खामोशी में शब्दों को बुनने की तलाश सन्नाटे में संगीत पनपने की तलाश हर चेहरे में खुशियां ढूढ़ने की अजीब सी तला...

प्यार

प्यार यूं तो है एक नन्हा सा अल्फ़ाज़, लेकिन है इसमें जीवन के सारे साज़, ना हैं ये किसी इंसान या वस्तु के लिए पागलपन का नाम, ना ही कुछ देने या लेने वाले किसी रिश्ते का नाम। ये तपती रू...

बुरा दौर

कौन है वो जीवन में जिसके बुरा वक्त ना आता? कौन है वो जिसे ये एक पल के लिए अपाहिज ना बनाता? रावण हो या राम हिटलर हो या ग़ालिब इसने किसको है बख्शा जीवन में सबके अलग तरह के बुरे दौर ह...