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खोजी मन

ये हर वक़्त क्या खोजता रहता है तू क्या ढूढ़ता है मेरे वजूद को ? या तराशता है मेरी शक़्ल को ? क्या खोजता है मेरे दर का रास्ता ? या मुझे पढ़ने की कोई किताब ढूढ़ता है ? या ढूढ़ता है हमारे उस आशियां की चाभी जो खो दी थी सर्कस देखते हुए कभी तो बता - ये हर वक़्त क्या खोजता रहता है तू? -शालिनी पाण्डेय

फूल और पात

कभी खिल जाती हूँ फूल सी कभी झड़ जाती हूँ पात सी मैं रोज अधूरी ही रह जाती हूं अनकही किसी बात सी। -शालिनी पाण्डेय

अनबूझी पहेली

कभी शांत सी कभी उदास सी कभी आनंदित सी कभी हताश सी मैं कभी बिखरी सी कभी सिमटी सी कभी पूनम सी कभी अमावस सी मैं कभी नदी सी कभी सैलाब सी कभी बयार सी कभी चक्रवात सी मैं कभी उथले शब्...

यादों की दस्तक़

तेरी यादों की दस्तक़ मेरी दहलीज़ पर अब तो रोज ही होती है घण्टों ये अब मुझसे बातें करने लगी है घर के कोनों पर इकट्ठा भी होने लगी है ज्यादा हो जाने पर किवाड़ों से झांकने लगी है इनम...

रात के घने अंधेरे में

रात के घने अंधेरे में भी जाने कैसे लिख लेती है चादर पर तेरा नाम ये अंगुलियां करवटे लेते हुए जाने कैसे पहुँच जाते है तेरे लब मेरे ख्वाब के जाम पर सिरहाने के पास ही जाने कैसे न...

मोहब्बत

तन्हाई में भी तन्हा ना होने दे मोहब्बत, रुसवाइयों में भी रुसवा ना होने दे मोहब्बत। यादों की एक महफ़िल है मोहब्बत, जब तू नहीं तो तेरा जिक्र है मोहब्बत। -शालिनी पाण्डेय

निःशब्द

जब मैं तुम्हें सोचते सोचते हो जाती हूँ निःशब्द, मुझे जाने क्यूं लगता है बिन लफ़्ज़ों के भी कह आयी हूं तुमसे सारी दास्तां। अब तुम ही बताओ क्या तुमने सुनी! - शालिनी पाण्डेय