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अंधेरे में

अंधेरे में ख़्वाब बुनती हूं, विरह का संगीत सुनती हूं, यादों के टुकड़े परोसती हूं, दर्द के पलों को चुनती हूँ, अपनी रूह को बिछाती हूं तेरे अहसास को ओढ़ती हूं, तुझसे जुदा होने पर मैं ऐसे ही तुझे साकारती हूं। ~ शालिनी पाण्डेय

तब और आज

हम छोड़ आये निर्बाध बहती नदियां आकाश चूमते पहाड़ हरे भरे चीड़ और देवदार कर आये पलायन आँगन में बहती ठंडी बयार से, लकड़ी और पत्थर के घरों से , छत पर टहलते सफेद बादलों से, जमीन के गर्भ से निकले धारों से, मडुवे और कौणी वाले अनाज से, हिसालू, किलमोडा, काफल से, और  अब हम रहते है ईट के तपते भट्टों के भीतर ज़हरीले धुएं के बीच पीते है बिसलरी का पानी खाते है डोमिनोज़ का पिज़्ज़ा और बातें करते है पेड़ लगाने की, पर्यावरण को बचाने की। ~ शालिनी पाण्डेय

मैं चाहती हूं

मैं चाहती हूं कि तेरी डायरी हो जाऊं जिसपे तू अनकही बातें लिख पाए मैं चाहती हूं कि चाय का प्याला हो जाऊं जिसे हर रोज तू अपने लबों से लगाए मैं चाहती हूं कि तेरे बिस्तर की चादर ह...

तेरे होने ने

जब तू नहीं था तो जीवन रूखा था ना कविताएँ थी ना गीत थे ना सावन था ना रंग थे तेरे होने ने मुझे रूखे जीवन की छाती में बीज उगाने का हौसला दिया तेरे होने ने मुझे कविताओं के अर्थ दिय...

प्यार का पन्ना

जीवन का ये पन्ना जितना कोरा है उतने ही रंग भी लिए हुए है एक ओर विरह की खाई दूजी ओर मिलन का शिखर लिए हुए है प्रियतम के मिलने की खुशी के साथ खुद की बेनकाबी का डर भी लिए हुए है प्यार जीवन का वो पन्ना है जो खूबसूरत और खतरनाक साथ में है । ~ शालिनी पाण्डेय

बारिश

देखो आज सारा दिन टप-टप करती संगीत बजाती हुई बारिश गिरती रही और साथ में तुम्हारी यादों को घोल - घोल मेरे आँगन में जमा करती रही । ~ शालिनी पाण्डेय

जुड़ा हुआ

क्या तूने सोचा कभी कि ये तेरी और मेरी बातें कभी ख़त्म क्यों नहीं होती ? मुझे लगता है कि ये बातें भर रही होती है हमारे बीच की दूरियों को लफ़्ज़ों से और बना रही होती है एक पुल फासलो...