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रिक्तता

कही भीतर कुछ है जो भरने की कोशिश में लगा है पर इसके बावजूद भी खाली सा रह जाता है। दिन की रोशनी में लगता है पूरा हो रहा है लेकिन रात फिर इसे अधूरा कर जाती है क्या ये तुम्हारे आन...

मैं तुझे जोड़ देती हूं

मैं तुझे जोड़ देती हूं हर उस कविता से हर उस कहानी से हर उस गीत से जिनमें आस है मिलन की मैं तुझे जोड़ देती हूं हर उस शेर से हर उस ग़ज़ल से हर उस दृश्य से जिसमें टीस है बिछड़न की मैं तुझ...

टक्कर

राह चलते वो मुझसे टकराई थोड़ा पास आयी और मुस्काई मेरी रूह बेनूर हो गई नजदीकियां जब यूँ टकराई -शालिनी पाण्डेय

कौन

मैं कौन हूं? ये प्रश्न बार बार मेरे सामने आता है कई बार खुद ब खुद कई बार लाया जाता है मैं कविता हूं नहीं, मैं कहानी हूं जिसका अंत होता है मैं क्या हूं? क्या मैं सचमुच कुछ हूं? क्य...

वक़्त के इंतजार में

वक़्त के इंतजार में दो राही ताक रहे थे राह सोच रहे थे कब आएगी राहें वो आसान ठहरे रहे आस लिए पर ढल गयी जीवन की सांझ अब यूं ही सबके लिए थोड़े आती राहें वो आसान। -शालिनी पाण्डेय

मैं

मैं तुम्हें बुनना चाहती थी लेकिन तुम उधड़ते गए मैं सम्हलना चाहती थी लेकिन गिरती रही मैं सुंदरता चाहती थी लेकिन जर्जर होती गई मैं तुम्हें सांसें देना चाहती थी लेकिन जल कर ख...

मैं चाहती थी

मैं चाहती थी तुम्हारी बाहें थामे लंबी सड़क पे चलना । तेरे काँधे पर सिर टिकाये समुद्र को देखना । मैं चाहती थी तुम्हारे साथ तन्हाई के कुछ लम्हें बांटना । सीमाओं को लांघकर तु...