कविता की तरह

तुम मेरे जीवन
में आये
कविता की तरह
वही कविता
जो मेरी पसंदीदा थी

शायद इसीलिए
तुम्हें संजो के रख पाना भी
उतना ही मुश्किल था
जितना उस कविता के अर्थ
को यथार्थ पर उतार पाना।

-शालिनी पाण्डेय

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