गीत जैसे

गीत जैसे
गुनगुनाते हो तुम
मेरे भीतर
और घोल जाते हो
ख़ुद को मुझ में।

- शालिनी पाण्डेय

Comments

Popular posts from this blog

वो लौट आएँगे, फिर से पिता बनकर

हिमालय की अछूती खूबसूरती: पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक

दीवार में एक खिड़की रहती थी- पुस्तक समीक्षा