सांझ

सांझ जैसे
जोड़ती है
उजाले को अंधेरे से
वैसे ही
आस 
जोड़े हुए है
एक जीवन को
दूसरे से....

- शालिनी पाण्डेय

Comments

Popular posts from this blog

वो लौट आएँगे, फिर से पिता बनकर

हिमालय की अछूती खूबसूरती: पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक

दीवार में एक खिड़की रहती थी- पुस्तक समीक्षा