Skip to main content

I became yours

It was a noon 
In the March
When things
Started to 
Grew stronger

Sailing on a boat
on the waves
First time
I imagined 
Sailing my 
Life boat 
Together with you 

On touching upon
By cold breeze
When I tightly holded 
yours hand 
I felt the
Warmth of you 

Some kind of 
Energies 
Tied my heart 
With yours 
At that very moments
My soul
Became yours..

- Shalini Pandey



Comments

Popular posts from this blog

हिमालय की अछूती खूबसूरती: पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक

राहुल सांकृत्यायन मानते थे कि घुमक्कड़ी मानव-मन की मुक्ति का साधन होने के साथ-साथ अपने क्षितिज विस्तार का भी साधन है। उन्होंने कहा भी था कि- "कमर बाँध लो भावी घुमक्कड़ों, संसार तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।" इसी से प्रेरणा लेते हुए हमने भी कमर कस ली और हम निकल पड़े पंचाचूली के दर्शन करने के लिए। घुमक्कड़ी चेतना के लिहाज से नए वर्ष 2024 के दिन किया गया यह ट्रैक मेरे लिए बहुत अविस्मरणीय है । यह यात्रा बहुत अचानक से ही आयोजित हुई, और इसके सफल कार्यान्वयन को लेकर सुबह तक असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।  लेकिन अंततः यह यात्रा हम कर पाये।  यात्रा के पहले दिन हम सुबह 6 बजे पिथौरागढ़ से धारचूला आए, फिर यहां से फिरमाल जी की टीम दारमा घाटी के सीमांत गांव हमें बालिंग तक ले गई। हम शाम के 4 बजे हिमालय की गोद में बसे इस गांव में पहुंचे और दो रात हमने यहां फाइबर ग्लास के बने इग्लूनुमा होम स्टे में बिताई। यहां का मौसम काफ़ी ठंडा था, सुबह - शाम को काफी तेज ठंडी हवाएं चल रही थी। पानी इतना ठंडा था कि छूते ही कंपन सा महसूस हो रहा था। ठण्ड अधिक होने के कारण नल से निकला हुआ पानी जम जा रहा था। रात...

दीवार में एक खिड़की रहती थी- पुस्तक समीक्षा

‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ विनोद कुमार शुक्ल जी का लिखा हुआ एक उपन्यास है। इस उपन्यास को वर्ष 1999 के साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। शुक्ल जी द्वारा लिखित, मेरे द्वारा पढ़ा गया यह पहला उपन्यास है। यह उपन्यास लंबे समय से मेरी पठन सूची में था, लेकिन इसे पढ़ना उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त होने के बाद ही संभव हो पाया। यह उपन्यास काफी संक्षिप्त है, केवल 250 पन्नों का। यह उपन्यास अपने नाम की तरह ही अनोखा है। इसे पढ़ते हुए लगता है जैसे हम किसी ठहरे हुए, धीमे-धीमे खुलते जीवन के भीतर प्रवेश करते जा रहे हों। उपन्यास की कहानी एक निम्न मध्यम वर्ग के साधारण किरदार रघुवर प्रसाद (गणित के प्राध्यापक) और सोनसी से संबंधित है, जो अपने एक छोटे-से कमरे में रहते हुए, रोज़मर्रा की दिक़्क़तों के बीच अपने सपनों और भावनाओं के लिए जगह तलाशते हैं। उपन्यास में दीवार और खिड़की केवल ईंट-पत्थर की चीज़ें ना हो कर, एक प्रतीक हैं। दीवार प्रतीक है - स्थिरता, बंधन और रोज़मर्रा के जीवन का, जबकि खिड़की प्रतीक प्रत्येक है- संभावना, उम्मीद और खूबसूरती का। दीवार में रह रही यह खिड़की हमारे जीवन का खु...

A way towards PEACE

Most people live whether physically, intellectually or morally- in a very restricted circle of their potential being. We all have reservoir of life to drew upon of which we do not dream.                          - William James In the book entitled "The Monk who sold his Ferrari" by Robin Sharma, the great sages of Shivana told a feble to Julian. Julian was a famous law practitioner, who got heart attack in the middle of court room due to the hyper- competitive legal professional world. Then he took retirement from his legal world and he went to the Sages of Sivana in order to find out peace. The great Yogi Raman told a feble to Julian Mental. In that feble, he told about a garden, which was a symbol for the human mind. The sages of Shivana told certain benefitial things like which I would like to share: If you care about your mind, if you nurture it and if you cu...