आज शाम

मैंने आज शाम के रंगों को घुलते देखा
घुलते हुए रंगों को बदलते हुए देखा
उल्लास को अवसाद होते देखा
अपने ख्वाबों को मरते हुए देखा...

- शालिनी पाण्डेय 

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