खाली रातों में

खाली रातों में
सन्नाटे के बीच
अंधेरे से घिरी
एक देह करवटे
बदल रही है

उसकी आंखों की
नींद गायब है
और दिल के दरवाजे पर
किसी दस्तक की इंतजारी है

- शालिनी पाण्डेय

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