हवा का झोंका


हवा का एक झोंका
डाली से जो टकराया
तो जमीन पे गिरे
सूखे हुए पत्ते पेड़ से

ऐसे ही

यादों का झोंका
जब टकराता है मुझसे
तो गिरती है भारी हो चुकी
सांसें मेरे चित्त से।

-शालिनी पाण्डेय

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