तुम आओगे

तुम आओगे
किसी रोज
सच में
वैसे ही
जैसे ख्वाबों
में आते हो।

कुछ रोज
मैं सिर्फ
तुम्हारे साथ में
जीना चाहती हूं
और
बाँटना चाहती हूं
मेरे कुछ हिस्से को
तुम से उसी रोज

- शालिनी पाण्डेय

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