धुंधला सा चाँद

धुंधला सा चांद
आया है आज
मेरी खिड़की पर,
इसका चेहरा
ठीक वैसा ही
दिखता है
जैसे तुम्हारा
चेहरा था
उस रोज
जब तुम
पहली बार
मिलने आये थे
बीमारी का
पीलापन लिए।

- शालिनी पाण्डेय

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