यादों की ओर

निकल पड़ी हूं आज मैं
अपने यादों के शहर की ओर

देखो मैंने बढ़ा दिया है
एक कदम तुम्हारी ओर

आशा है अब तो  तुम भी चलोगे
कुछ कदम मेरी ओर ।

- शालिनी पाण्डेय

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