दूरियां

जब अंदाज़ा ना था
करीबियों का
तो ये दूरियां भी
खलती ना थी

लेकिन उस रोज से
जब तू गले लगाकर
बोसा देकर चला गया
तो ये दूरियां खलने लगी।

~ शालिनी पाण्डेय

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