नौकरी

नौकरी देखो तो
तुम्हारा कद
कितना बड़ा हो गया है,

तुम्हारी ख़ातिर हमने
बिना आँसू बहाये
अपनी नदियों, पहाड़ों और
घरों से पलायन कर लिया ।

~ शालिनी पाण्डेय

Comments

Popular posts from this blog

वो लौट आएँगे, फिर से पिता बनकर

हिमालय की अछूती खूबसूरती: पंचाचूली बेस कैंप ट्रैक

दीवार में एक खिड़की रहती थी- पुस्तक समीक्षा